JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू जिले में जल जीवन मिशन के तहत हर ग्रामीण घर तक नल से पानी पहुंचाने का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो पाया है। संसद में हाल ही में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2019 में योजना की शुरुआत के समय जम्मू जिले के 1.89 लाख ग्रामीण परिवारों में से केवल 49 हजार यानी 25.79 प्रतिशत घरों में ही नल कनेक्शन उपलब्ध था। छह साल की अवधि में इस आंकड़े में सुधार हुआ है और अब 1.26 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों, यानी 66.71 प्रतिशत घरों तक नल का पानी पहुंचने का दावा किया गया है।
हालांकि, इसका दूसरा पहलू यह है कि जम्मू जिले के अभी भी 33.29 प्रतिशत ग्रामीण परिवार नल से पानी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। यानी बड़ी संख्या में ऐसे परिवार मौजूद हैं, जहां जल जीवन मिशन का कनेक्शन या तो पहुंचा नहीं है या नियमित पेयजल आपूर्ति अभी सुनिश्चित नहीं हो पाई है।
छह साल में जुड़े 77 हजार से ज्यादा परिवार
जल जीवन मिशन की शुरुआत अगस्त 2019 में हुई थी। उस समय जम्मू जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 1.89 लाख परिवारों में से करीब 49 हजार परिवारों के पास ही नल कनेक्शन था। योजना लागू होने के बाद 77 हजार से अधिक नए ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन नेटवर्क से जोड़ा गया, जिससे लाभान्वित परिवारों की संख्या बढ़कर 1.26 लाख से अधिक हो गई।
आंकड़े प्रगति जरूर दिखाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर तस्वीर अभी पूरी तरह संतोषजनक नहीं है। कई ग्रामीण इलाकों में लोगों को पानी के लिए अपनी जेब से पाइप लाइन बिछाने, बोरवेल करवाने या दूसरे वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने खुद खर्च कर बिछाईं पाइपें
चौआदी निवासी भूपेश कुमार और दयारन निवासी मुनीश के अनुसार, कई परिवारों ने घर तक पानी पहुंचाने के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च कर दूर से पाइपें डलवाई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कुछ घरों तक अभी तक सरकारी स्तर पर पाइप लाइन नहीं पहुंची है। पानी की जरूरत पूरी करने के लिए कई परिवारों ने अपने घरों में बोर भी करवाए हैं।
इससे साफ है कि केवल नल कनेक्शन उपलब्ध होना और घर तक नियमित एवं पर्याप्त पेयजल पहुंचना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
जम्मू-कश्मीर में 7,094 करोड़ रुपये से अधिक खर्च
जल जीवन मिशन के तहत जम्मू-कश्मीर में पेयजल ढांचे को विकसित करने पर बड़ी राशि खर्च की गई है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेश में योजना के तहत अब तक करीब 7,094.05 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
इस राशि के तहत कुल 3,253 जलापूर्ति योजनाएं शुरू की गई थीं। इनमें से करीब 1,469 योजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि बाकी योजनाएं अभी अलग-अलग चरणों में चल रही हैं।
दिसंबर 2028 तक बढ़ी योजना की समयसीमा
जल जीवन मिशन के तहत निर्धारित समय में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल नहीं होने के कारण केंद्र सरकार ने योजना की समयसीमा बढ़ाकर दिसंबर 2028 कर दी है। अब अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने और ग्रामीण परिवारों तक वास्तविक रूप से पेयजल पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
नई व्यवस्था में योजनाओं की निगरानी, पारदर्शिता, डिजिटल मैपिंग और संबंधित दिशा-निर्देशों के पालन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
कनेक्शन से आगे बढ़कर नियमित पानी जरूरी
जम्मू जिले के आंकड़े बताते हैं कि छह साल में नल कनेक्शन की पहुंच 25.79 प्रतिशत से बढ़कर 66.71 प्रतिशत हुई है। यह निश्चित रूप से बड़ी प्रगति है, लेकिन 33.29 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों का अब भी इंतजार करना यह सवाल खड़ा करता है कि योजना का लाभ जमीन पर कब तक पूरी तरह पहुंचेगा।
जल जीवन मिशन की असली सफलता सिर्फ घर के बाहर नल लगाने से नहीं, बल्कि उस नल से नियमित, पर्याप्त और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने से तय होगी। दिसंबर 2028 की नई समयसीमा अब प्रशासन के सामने अधूरे काम को पूरा करने और कागजों पर दर्ज कनेक्शनों को वास्तविक जलापूर्ति में बदलने की चुनौती लेकर आई है।



