JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर के पांच मेडिकल कॉलेजों में गैर राजपत्रित कर्मचारियों की काम छोड़ो हड़ताल लगातार चौथे दिन भी जारी रही। भर्ती एवं सेवा नियम लागू करने की मांग को लेकर कर्मचारी अपने आंदोलन पर डटे हुए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वर्ष 2019 में मेडिकल कॉलेज स्थापित होने के बावजूद आज तक उनके लिए सेवा भर्ती नियम तैयार नहीं किए गए हैं, जिसके कारण कर्मचारियों की भर्ती और पदोन्नति की प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
हड़ताल का असर जम्मू संभाग के कठुआ, राजौरी और डोडा तथा कश्मीर संभाग के बारामुला और अनंतनाग मेडिकल कॉलेजों में देखने को मिल रहा है। कर्मचारियों ने पांचों मेडिकल कॉलेजों में प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ अपना रोष जताया और जल्द से जल्द भर्ती नियम लागू करने की मांग उठाई।
सात साल से नियमों का इंतजार
कर्मचारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेजों की स्थापना को करीब सात वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक सेवा भर्ती नियम नहीं बनाए गए हैं। उनका कहना है कि नियमों के अभाव में न तो नई भर्तियां हो पा रही हैं और न ही मौजूदा कर्मचारियों को समय पर पदोन्नति का लाभ मिल रहा है।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उनकी इस मांग को लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि इतने वर्षों में मेडिकल कॉलेजों में बिस्तरों की संख्या बढ़ी है और एमबीबीएस सीटों में भी इजाफा हुआ है, लेकिन कर्मचारियों से जुड़े भर्ती और पदोन्नति नियमों पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाया गया।
स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा असर
कर्मचारियों की हड़ताल का सीधा असर अस्पतालों की सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ओपीडी, इंडोर सेवाओं, नियमित सर्जरी और लैब टेस्ट जैसी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। हालांकि इमरजेंसी सेवाएं जारी हैं, लेकिन वहां भी मरीजों की भीड़ बढ़ने से दबाव देखने को मिल रहा है।
कई मरीजों को सामान्य उपचार के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे मेडिकल कॉलेजों में हड़ताल ने मरीजों की परेशानियां और बढ़ा दी हैं।
सरकार से बातचीत नहीं होने पर नाराजगी
हड़ताल कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि सरकार की ओर से अभी तक उनके साथ कोई ठोस बातचीत नहीं की गई है। कर्मचारियों में इस बात को लेकर नाराजगी है कि उनकी वर्षों पुरानी मांग पर सरकार गंभीरता नहीं दिखा रही।
कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। अब देखना होगा कि सरकार कर्मचारियों की मांगों पर कब बातचीत शुरू करती है और पांचों मेडिकल कॉलेजों में सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं कब पूरी तरह बहाल हो पाती हैं।



