JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
लद्दाख की ऊंची पहाड़ियों और बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच पांचवीं सिल्क रूट अल्ट्रा रेस का रोमांचक आगाज हो गया। 122 किलोमीटर लंबी इस चुनौतीपूर्ण दौड़ में 120 से अधिक धावक हिस्सा ले रहे हैं। धावकों को समुद्र तल से 5,370 मीटर की ऊंचाई पर स्थित खारदुंग ला दर्रे को पार करना होगा। कम ऑक्सीजन, बेहद ऊंचाई और कठिन पहाड़ी रास्तों के बीच होने वाली यह दौड़ प्रतिभागियों की शारीरिक क्षमता के साथ-साथ उनके मानसिक साहस की भी परीक्षा लेगी।
लद्दाख मैराथन के 13वें संस्करण के तहत आयोजित इस प्रतिष्ठित दौड़ को वीरवार शाम नुब्रा घाटी के क्यागर गांव से रवाना किया गया। नुब्रा जिले के उपायुक्त मुकुल बेनीवाल ने धावकों को झंडी दिखाकर दौड़ की शुरुआत कराई।
यह दौड़ समुद्र तल से करीब 3,140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित क्यागर से शुरू हुई। इसके बाद धावक सुमूर, लाकजुंग, तिरिथ, खालसर और खारदुंग सहित कई दुर्गम क्षेत्रों से गुजरेंगे। दौड़ का सबसे कठिन चरण खारदुंग ला दर्रे का होगा, जहां धावकों को करीब 5,370 मीटर की ऊंचाई तक पहुंचना होगा। इसके बाद वे खारदुंग ला से उतरते हुए लेह की ओर बढ़ेंगे।
72 किलोमीटर की दूसरी चुनौती
सिल्क रूट अल्ट्रा रेस के साथ 72 किलोमीटर लंबी खारदुंग ला चुनौती दौड़ भी आयोजित की जा रही है। यह दौड़ शुक्रवार तड़के करीब तीन बजे खारदुंग गांव से शुरू होगी। दोनों दौड़ों का अंतिम पड़ाव लेह का मुख्य बाजार होगा, जहां 11 सितंबर को प्रतियोगिताओं का समापन किया जाएगा। प्रतिभागियों के लिए शाम पांच बजे अंतिम समय सीमा निर्धारित की गई है।
सिर्फ दौड़ नहीं, विरासत से जुड़ा आयोजन
सिल्क रूट अल्ट्रा रेस को केवल एक खेल प्रतियोगिता के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका संबंध उस ऐतिहासिक मार्ग से भी है, जिसने सदियों तक लद्दाख को व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहचान दिलाई। इसी वजह से इस आयोजन में खेल के साथ लद्दाख की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को भी सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
क्यागर गांव में ग्रामीणों ने सांस्कृतिक संध्या का आयोजन कर प्रतिभागियों का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। स्थानीय लोगों ने धावकों का उत्साह बढ़ाया और उन्हें इस कठिन चुनौती के लिए शुभकामनाएं दीं।
सुरक्षा और पर्यावरण पर भी जोर
इतनी अधिक ऊंचाई और दुर्गम इलाकों में दौड़ आयोजित करना अपने आप में बड़ी चुनौती है। आयोजकों की ओर से धावकों की सहायता और सुरक्षा के लिए विशेष सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं। मार्ग में आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी ध्यान रखा जा रहा है।
लद्दाख की कठिन परिस्थितियों के बीच आयोजित यह दौड़ दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले धावकों के लिए साहस और सहनशक्ति की परीक्षा है। दूसरी ओर, यह आयोजन लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत और ऐतिहासिक सिल्क रूट को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का माध्यम भी बन रहा है।



