JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल | जम्मू
ग्रीष्मकालीन राजधानी में आयोजित पहला जम्मू-कश्मीर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव सूफी संगीत की रूहानी धुनों के बीच संपन्न हो गया। चार दिनों तक चले इस महोत्सव ने जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता, स्थानीय प्रतिभा और सिनेमाई संभावनाओं को देश-दुनिया के सामने एक नए अंदाज में पेश किया। महोत्सव के समापन के साथ ही आयोजकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों ने इसे जम्मू-कश्मीर में सिनेमा के नए दौर की शुरुआत बताया।
महोत्सव का उद्देश्य केवल फिल्मों का प्रदर्शन और मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा। इसके माध्यम से जम्मू-कश्मीर को एक ऐसे क्षेत्र के रूप में स्थापित करने की कोशिश की गई, जहां केवल फिल्मों की शूटिंग ही नहीं, बल्कि कहानी लेखन, निर्देशन, निर्माण और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए भी बेहतर माहौल तैयार हो सके।
चार दिनों के दौरान फिल्म जगत से जुड़े विभिन्न विषयों पर सत्र आयोजित किए गए। फिल्म निर्देशकों, निर्माताओं और कलाकारों ने अपने अनुभव साझा किए और जम्मू-कश्मीर में काम करने से जुड़ी अपनी यादों को दर्शकों के साथ साझा किया। इन संवादों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को फिल्म निर्माण की अलग-अलग विधाओं को समझने का अवसर मिला।
महोत्सव का सबसे आकर्षक प्रयोग डल झील में आयोजित तैरता हुआ सिनेमा रहा। झील के बीच फिल्मों को देखने का यह अनोखा अनुभव देश और विदेश से आए 360 से अधिक प्रतिनिधियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना। इस प्रयोग ने यह दिखाया कि कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता को केवल पर्दे की पृष्ठभूमि के रूप में इस्तेमाल करने के बजाय उसे स्वयं सिनेमाई अनुभव का हिस्सा बनाया जा सकता है।
समापन समारोह में लोक गायक गुलजार अहमद गनई की सूफी प्रस्तुति ने माहौल को पूरी तरह रूहानी बना दिया। सूफी संगीत की मधुर धुनों के बीच महोत्सव का समापन हुआ और उपस्थित दर्शकों ने प्रस्तुति का आनंद लिया।
इस पूरे आयोजन का एक महत्वपूर्ण पहलू जम्मू-कश्मीर के युवाओं को फिल्म जगत की ओर आकर्षित करना भी रहा। आयोजकों का जोर इस बात पर रहा कि स्थानीय युवा फिल्म निर्माण, निर्देशन, लेखन, अभिनय और कहानी कहने जैसी रचनात्मक विधाओं को केवल शौक के रूप में नहीं, बल्कि रोजगार और करियर के विकल्प के रूप में भी देखें।
महोत्सव से यह संदेश भी सामने आया कि जम्मू-कश्मीर अब केवल बाहरी फिल्म निर्माताओं के लिए सुंदर शूटिंग स्थल बने रहने तक सीमित नहीं रहना चाहता। स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देकर यहां अपनी कहानियों को स्थानीय स्तर से लेकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने की संभावनाएं तलाशने की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा रहा है।
पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव ने जम्मू-कश्मीर के लिए मनोरंजन से आगे बढ़कर रचनात्मक अर्थव्यवस्था और स्थानीय प्रतिभाओं के विकास की नई संभावना पैदा की है। आने वाले समय में यदि इस पहल को प्रशिक्षण, स्थानीय फिल्म निर्माण और युवाओं के लिए अवसरों से जोड़ा जाता है, तो यह जम्मू-कश्मीर में सिनेमा के क्षेत्र में बड़े बदलाव की नींव बन सकती है।


