JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर में सरकारी कामकाज और नागरिक सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। भूमि एवं राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल रूप देने के साथ-साथ सरकारी कार्यालयों में ऑनलाइन व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य लोगों को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना और रिकॉर्ड को अधिक सुरक्षित एवं आसानी से उपलब्ध कराना है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के 6,844 गांवों में अब तक 7.29 करोड़ राजस्व दस्तावेजों को स्कैन किया जा चुका है। वहीं, 99.4 प्रतिशत जमाबंदी रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है। इससे जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल माध्यम से सुरक्षित रखने और जरूरत पड़ने पर उन्हें आसानी से उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
नक्शों के डिजिटलीकरण में भी तेजी
भूमि रिकॉर्ड के साथ गांवों के नक्शों को भी डिजिटल रूप देने का काम आगे बढ़ रहा है। अभियान के तहत चिन्हित 6,850 नक्शा शीट में से 6,544 का डिजिटलीकरण पूरा किया जा चुका है। इस तरह नक्शों के डिजिटलीकरण का काम 94.23 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
इसके अलावा जम्मू-कश्मीर के कुल 6,455 गांवों की मैपिंग पूरी हो चुकी है, जो करीब 93.4 प्रतिशत है। इनमें से 5,700 गांवों की जमीनी स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया भी पूरी की जा चुकी है। वहीं, 20 जिलों के 1,925 गांवों में उप-भूखंड निर्धारण का काम पूरा हो गया है।
सरकारी कार्यालयों में भी ऑनलाइन व्यवस्था
डिजिटल बदलाव केवल भूमि रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। जम्मू-कश्मीर के सचिवालय, विभागाध्यक्ष कार्यालयों और जिला स्तर के कार्यालयों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की जा चुकी है। अब इसे तहसील और ब्लॉक स्तर तक विस्तार देने की प्रक्रिया चल रही है।
आंकड़ों के मुताबिक, 430 सरकारी संगठनों में 45,953 से अधिक उपयोगकर्ता ई-ऑफिस व्यवस्था से जुड़े हैं। इसके अलावा 1,710 सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। डिजिटल व्यवस्था के माध्यम से अब तक 70 लाख से अधिक दस्तावेज भी उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
डिजिलॉकर से लेकर शिकायत निवारण तक डिजिटल सेवाओं का विस्तार
डिजिटल दस्तावेजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए डिजिलॉकर व्यवस्था का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर में डिजिलॉकर से जुड़ी 188 सेवाएं उपलब्ध हैं और इसके 35.50 लाख पंजीकृत उपयोगकर्ता बताए गए हैं।
वहीं, लोगों तक डिजिटल सेवाएं पहुंचाने में कामन सर्विस सेंटर भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर में 942 कामन सर्विस सेंटर टच प्वाइंट के तौर पर काम कर रहे हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन करीब पांच लाख डिजिटल लेनदेन दर्ज किए जा रहे हैं।
शिकायतों के समाधान के लिए 3के समाधान ऐप का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, इस मंच पर प्रतिदिन करीब 300 शिकायतें प्राप्त होती हैं और इनके निस्तारण की दर लगभग 94 प्रतिशत बताई गई है।
आईटी क्षेत्र में 40 से अधिक पहल
जम्मू-कश्मीर में डिजिटल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बीआईएसएजी-एन के सहयोग से 40 से अधिक आईटी पहल शुरू की गई हैं। इन पहलों का मकसद सरकारी कामकाज को तकनीक से जोड़ना और आम लोगों के लिए सेवाओं की उपलब्धता को अधिक आसान बनाना है।
भूमि रिकॉर्ड, गांवों की मैपिंग, डिजिटल दस्तावेज, ऑनलाइन सरकारी सेवाएं और ई-ऑफिस जैसी व्यवस्थाओं के विस्तार से प्रशासनिक कामकाज में कागजी प्रक्रिया पर निर्भरता कम करने की दिशा में प्रयास किया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर में चल रहे इस डिजिटल बदलाव से आने वाले समय में जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, सरकारी दस्तावेजों और विभिन्न सेवाओं तक लोगों की पहुंच और आसान होने की उम्मीद है। खासकर भूमि रिकॉर्ड के बड़े पैमाने पर डिजिटलीकरण से पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित रखने और जरूरत के समय उन्हें डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।



