JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने एक बार फिर केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग दोहराई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर अमृतसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर जम्मू-कश्मीर के लिए कोई बड़ी घोषणा की जानी है तो राज्य का दर्जा बहाल करना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि अगर और कुछ नहीं तो जम्मू-कश्मीर को उसका राज्य का दर्जा ही वापस दे दिया जाए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को इससे ज्यादा और क्या चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा चुनावों के बाद जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की बात कही गई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इस संबंध में कोई लिखित प्रतिबद्धता नहीं दी गई। उनके अनुसार, संसद और सुप्रीम कोर्ट में भी राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर मौखिक आश्वासन दिए गए थे।
परिसीमन और चुनाव के बाद भी राज्य का दर्जा लंबित
उमर अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बताई गई प्रक्रिया के अनुसार पहले परिसीमन, उसके बाद विधानसभा चुनाव और फिर जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल किया जाना था। मुख्यमंत्री के मुताबिक परिसीमन और विधानसभा चुनाव दोनों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, लेकिन राज्य का दर्जा बहाल करने का फैसला अभी तक लंबित है।
उन्होंने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार से अपना पुराना आग्रह दोहराते हुए कहा कि अब राज्य का दर्जा बहाल करने की दिशा में कदम उठाया जाना चाहिए।
लद्दाख को दी लिखित आश्वासन लेने की सलाह
लद्दाख के नेताओं और केंद्र सरकार के बीच चल रही बातचीत को लेकर भी उमर अब्दुल्ला ने अपनी बात रखी। उन्होंने लद्दाख के नेताओं को जम्मू-कश्मीर के अनुभव से सीख लेने की सलाह दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल मौखिक आश्वासनों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि किसी भी प्रतिबद्धता को लिखित रूप में लेना जरूरी है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर पहले मौखिक आश्वासन दिए गए थे, लेकिन अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
यूपीआई शुल्क पर भी उमर ने रखी बात
पत्रकारों से बातचीत के दौरान उमर अब्दुल्ला ने यूपीआई लेनदेन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर शुल्क के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं डाला जा सकता और इसकी लागत लेनदेन की सुविधा देने वाले कारोबारियों पर लागू होगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के बीच होने वाले यूपीआई लेनदेन पर इस तरह का शुल्क लागू नहीं होगा। साथ ही उन्होंने जिस व्यवस्था का उल्लेख किया, उसके अनुसार दो हजार रुपये से कम के व्यापारी लेनदेन पर भी मर्चेंट शुल्क नहीं लगेगा।
मुख्यमंत्री के इन बयानों के बीच जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। परिसीमन और विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्य का दर्जा बहाल करने को लेकर केंद्र सरकार की ओर से अगले कदम का इंतजार किया जा रहा है।



