JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
जम्मू स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM जम्मू) में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित दीप प्रज्ज्वलन समारोह में छात्रों की कथित अनिवार्य उपस्थिति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस सांसद और जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रभारी सैयद नासिर हुसैन ने संस्थान की ओर से छात्रों को जारी किए गए कथित नोटिस को लेकर सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, समारोह में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों से गैरहाजिरी का लिखित कारण मांगा गया और जवाब नहीं देने की स्थिति में 500 रुपये जुर्माना लगाने की बात कही गई।
जानकारी के अनुसार, 17 सितंबर को आईआईएम जम्मू परिसर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर दीप प्रज्ज्वलन समारोह आयोजित किया गया था। कांग्रेस नेता की ओर से इंटरनेट मीडिया पर साझा किए गए कथित नोटिस में कार्यक्रम को अनिवार्य बताया गया है। नोटिस के अनुसार, जो छात्र कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए, उन्हें अपनी अनुपस्थिति का लिखित कारण बताने के लिए कहा गया था।
कथित नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया कि अनुपस्थिति की छूट केवल चिकित्सकीय आधार पर स्वीकार की जाएगी। इसके लिए संबंधित छात्र को आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा, जिसमें संबंधित अवधि के लिए बिस्तर पर आराम की सलाह का प्रमाण शामिल हो।
कांग्रेस ने उठाए संस्थान की भूमिका पर सवाल
सैयद नासिर हुसैन ने इस पूरे मामले को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम में छात्रों की उपस्थिति अनिवार्य क्यों की जानी चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या किसी प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रम में छात्रों की अनिवार्य भागीदारी किसी शैक्षणिक संस्थान की अकादमिक जिम्मेदारी का हिस्सा है।
उन्होंने शिक्षण संस्थानों में छात्रों की स्वतंत्र सोच और अकादमिक वातावरण को लेकर भी चिंता जताई। कांग्रेस नेता ने कहा कि विद्यार्थियों को किसी राजनीतिक नेता से जुड़े कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए और अनुपस्थिति के लिए जुर्माने की चेतावनी देना भी उचित नहीं है।
IIM जम्मू की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई
इस मामले में खबर लिखे जाने तक आईआईएम जम्मू की ओर से इस कथित नोटिस और लगाए गए आरोपों पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था। ऐसे में नोटिस की परिस्थितियों और 500 रुपये जुर्माने के प्रावधान को लेकर संस्थान का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।
मामले ने एक बार फिर उच्च शिक्षण संस्थानों में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों, छात्रों की भागीदारी और संस्थानों की प्रशासनिक भूमिका को लेकर चर्चा शुरू कर दी है। फिलहाल विवाद का केंद्र कथित नोटिस, अनिवार्य उपस्थिति और अनुपस्थिति पर जुर्माने की बात बनी हुई है।



