JNM पत्रकार हरदीप जमवाल, जम्मू
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने बसों और मिनी बसों में महिलाओं के लिए निर्धारित आरक्षित सीटों को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने साफ किया है कि आरक्षित सीटों पर नियमों का पालन सुनिश्चित करना परिवहन विभाग की जिम्मेदारी होगी।
कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस मोहम्मद यूसुफ वानी की खंडपीठ ने अधिवक्ता मोनिसा मंजूर मीर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए।
बड़ी बसों में 12 और मिनी बसों में 9 सीटें आरक्षित
हाईकोर्ट ने परिवहन आयुक्त को निर्देश दिया कि बड़ी बसों में सीट नंबर 1 से 12 तक महिलाओं के लिए आरक्षित रहें। वहीं, मिनी बसों में सीट नंबर 1 से 9 तक महिलाओं के लिए आरक्षित रखने को कहा गया है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इन सीटों पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में ‘महिलाओं के लिए आरक्षित’ लिखा होना चाहिए, ताकि यात्रियों को सीटों के आरक्षित होने की जानकारी आसानी से मिल सके।
298 महिलाओं की जानकारी का याचिका में हवाला
जनहित याचिका में सार्वजनिक परिवहन के दौरान महिलाओं को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया गया था। याचिकाकर्ता की ओर से 298 महिलाओं से जुटाई गई जानकारी का हवाला देते हुए बताया गया कि 85.6 प्रतिशत महिलाओं ने यात्रा के दौरान किसी न किसी तरह की परेशानी या असहजता महसूस होने की बात कही।
इसी को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मानजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए।
शिकायतों के समाधान की भी बनेगी व्यवस्था
हाईकोर्ट ने परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस को आपस में बैठक कर ऐसी प्रभावी व्यवस्था तैयार करने को कहा है, जिसके माध्यम से महिलाएं सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज करा सकें और उनका समय पर समाधान भी हो सके।
इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण को बस चालकों और सहायकों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उन्हें महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों समेत अन्य जरूरी नियमों की जानकारी दी जा सके।
हाईकोर्ट के इन निर्देशों के बाद अब सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों के नियम को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ गई है। देखना होगा कि इन निर्देशों को जमीनी स्तर पर कितनी सख्ती से लागू किया जाता है।



