JNM पत्रकार हरदीप जम्वाल, जम्मू
लद्दाख में पिछले वर्ष 24 सितंबर को लेह में हुए हिंसक प्रदर्शन के बाद युवाओं और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। इस मुद्दे पर लद्दाख के विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और धार्मिक संगठनों के बीच व्यापक सहमति दिखाई दे रही है। नेताओं का कहना है कि विश्वास बहाली के लिए प्रदर्शन से जुड़े मामलों की मानवीय दृष्टिकोण से समीक्षा कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से वापस लिया जाना चाहिए।
इसी मांग को लेकर लद्दाख के पूर्व सांसद थुपस्तान छिवांग और लद्दाख स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद (लेह) के पूर्व मुख्य कार्यकारी पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता ताशी ग्यालसन ने उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना से मुलाकात की। दोनों नेता लद्दाख के मुद्दों पर गृह मंत्रालय द्वारा गठित हाई पावर्ड कमेटी के सदस्य भी हैं।
युवाओं को अभी भी थाने में देनी पड़ रही हाजिरी
बैठक के दौरान नेताओं ने बताया कि 24 सितंबर की घटना से जुड़े कई मामलों के कारण युवाओं को अभी भी कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है और कुछ युवाओं को नियमित रूप से थाने में हाजिरी देनी पड़ती है। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में इन मामलों की संवेदनशीलता के साथ समीक्षा जरूरी है।
नेताओं ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में मानवीय और सद्भावना आधारित दृष्टिकोण अपनाते हुए उचित कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि ऐसे कदम लद्दाख में लोगों के बीच विश्वास बहाल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
आर्थिक सहायता और मुआवजे की भी मांग
उपराज्यपाल के साथ बैठक में 24 सितंबर की घटना में जान गंवाने वाले लोगों और घायलों के परिवारों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित परिवारों को आर्थिक मुआवजा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
नेताओं ने यह भी कहा कि गृह मंत्रालय के साथ 22 मई को हुई चर्चा में इन मामलों पर संवेदनशीलता और करुणा के साथ विचार करने की बात सामने आई थी। इसी आधार पर अब मामलों की समीक्षा कर चरणबद्ध तरीके से उन्हें वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की जा रही है।
इसके साथ ही लेह हिंसा से संबंधित मामले की जांच के लिए गठित न्यायमूर्ति बीएस चौहान समिति की रिपोर्ट को जल्द सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई गई।
लद्दाख मुद्दे पर अगली बैठक जल्द बुलाने की मांग
बैठक के दौरान लद्दाख के व्यापक राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दों पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर आगे की बातचीत के लिए अगली बैठक की तारीख जल्द तय की जाए।
लद्दाख के प्रतिनिधियों का कहना है कि केंद्र और संबंधित पक्षों के बीच संवाद के संभावित ढांचे को लेकर व्यापक स्तर पर सहमति बन चुकी है। अब इसे अंतिम रूप देने के लिए औपचारिक प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
गृह मंत्रालय की हाई पावर्ड कमेटी की मई में हुई बैठक के बाद लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद जताई गई थी। हालांकि, कई महीने बीतने के बाद भी प्रस्तावित प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक ड्राफ्ट सामने नहीं आया है।
दिल्ली में भी उठ रहा मुद्दा
लद्दाख के सांसद मोहम्मद हनीफा भी हाल ही में दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर लद्दाख से जुड़े मुद्दों पर आगे कार्रवाई की मांग कर चुके हैं।
फिलहाल लद्दाख में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की प्रमुख मांग यही है कि 24 सितंबर की घटना से जुड़े मामलों में युवाओं को राहत दी जाए, प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता मिले और केंद्र सरकार लद्दाख के मुद्दों पर बातचीत की प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाए।



